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समस्तीपुर: सिंघिया में राजकीय महाविद्यालय शुरू करने की तैयारी तेज, डीएम रोशन कुशवाहा ने व्यवस्थाओं का लिया जायजा

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समस्तीपुर के सिंघिया प्रखंड में प्रस्तावित राजकीय महाविद्यालय की तैयारियों का जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने निरीक्षण किया। सरकार की सात निश्चय-3 योजना के तहत जल्द उच्च शिक्षा की सुविधा शुरू करने की दिशा में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखंड में उच्च शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सात निश्चय-3 योजना के तहत जिन प्रखंडों में अब तक डिग्री कॉलेज की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां सरकारी महाविद्यालय शुरू करने की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने सिंघिया में प्रस्तावित राजकीय महाविद्यालय के लिए चल रही तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान महाविद्यालय के लिए चयनित भवन और वहां उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया। उन्होंने कक्षाओं की स्थिति, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, बिजली, फर्नीचर, साफ-सफाई, सुरक्षा और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि किसी भी प्रकार की कमी को तुरंत दूर किया जाए ताकि निर्धारित समय के भीतर महाविद्यालय का संचालन शुरू किया जा सके।

सिंघिया जैसे प्रखंड में सरकारी महाविद्यालय की स्थापना को क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब तक यहां के छात्र-छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए समस्तीपुर, रोसड़ा, दरभंगा या अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ समय की भी काफी बर्बादी होती थी। विशेष रूप से ग्रामीण परिवारों की छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सरकारी महाविद्यालय खुलने से हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भवन तैयार करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और सुगम उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि महाविद्यालय के संचालन से जुड़ी सभी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रारंभिक चरण से ही विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़े।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार महाविद्यालय शुरू होने के बाद क्षेत्र में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और बड़ी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं भी कॉलेज तक पहुंच पाएंगे जो दूरी या आर्थिक कारणों से आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। इससे शिक्षा का स्तर बेहतर होने के साथ-साथ क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।

निरीक्षण के दौरान निर्माण और अनुरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने भवन की उपयोगिता, सुरक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल से ही महाविद्यालय का संचालन समय पर शुरू किया जा सकता है।

बैठक में मौजूद अधिकारियों से महाविद्यालय के संचालन की तैयारियों की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई। जिन कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाना है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही परिसर की स्वच्छता, विद्यार्थियों की सुरक्षा और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी महाविद्यालयों की स्थापना से उच्च शिक्षा का विस्तार होगा और स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे उच्च शिक्षा में नामांकन दर बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर आधार मिलेगा।

सात निश्चय-3 कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दे रही है। इसी नीति के तहत उन प्रखंडों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां अब तक डिग्री कॉलेज उपलब्ध नहीं हैं। सिंघिया में प्रस्तावित राजकीय महाविद्यालय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान सूर्य प्रताप सिंह, कामेश्वर प्रसाद गुप्ता सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने महाविद्यालय के संचालन के लिए आवश्यक कार्यों को तय समय पर पूरा करने का भरोसा दिलाया।

यदि सभी तैयारियां निर्धारित योजना के अनुसार पूरी होती हैं तो आने वाले समय में सिंघिया के विद्यार्थियों को अपने ही प्रखंड में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे शिक्षा का विस्तार होने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की उपलब्धता केवल शैक्षणिक सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव का आधार भी होती है। सिंघिया में प्रस्तावित राजकीय महाविद्यालय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि निर्धारित समय पर इसका संचालन शुरू हो जाता है तो हजारों विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से छात्राओं की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ने की संभावना है। प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि महाविद्यालय केवल उद्घाटन तक सीमित न रहे बल्कि पर्याप्त शिक्षकों, संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के साथ दीर्घकाल तक प्रभावी रूप से संचालित हो।

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